रूस ने यूक्रेन को घेरने के लिए अब तक की सबसे घातक चाल चली है. यूक्रेन की राजधानी कीव को घेरने के साथ-साथ रूस ने उसको लैंडलॉक कंट्री में परिवर्तित करने का पूरा खाका तैयार कर लिया है. सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसा करके रूस, यूक्रेन को उस राष्ट्र में परिवर्तित कर देगा जिसका समुद्री तटों से कोई लेना-देना नहीं रहेगा. ऐसा करके रूस यूक्रेन को बर्बादी के आखिरी कगार तक पहुंचाने का पूरा रोड मैप तैयार करने की भूमिका बना रहा है.
विद्रोहियों को उकसा रहा रूस
विराष्ट्रों में तैनात रहे सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े जानकारों की माने तो जिस तरीके से रूस ने भौगोलिक रूप से अपनी स्ट्रेटजी बनाकर यूक्रेन को घेरने की योजना बनाई है वह बड़ी घातक है. एक वरिष्ठ पूर्व राजनयिक के अनुसार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कुछ दिनों पहले ही यूक्रेन के पूर्व में लुहान्स और डॉन्सटेक को नए राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी थी. दक्षिण में क्रीमिया पर पर भी रूस के आधिपत्य से उसी की सत्ता थी. इसी के चलते यूक्रेन के दक्षिणी हिस्से में अजाव समुद्र से उसका नाता समाप्त हो चुका है. इस पूरे मामले पर नजर बनाए रखने वाले वरिष्ठ सुरक्षा जानकार बताते हैं कि रूस ने मॉलडोवा राष्ट्र के उत्तरी हिस्से में जो कि यूक्रेन से लगता है वहां पर विद्रोहियों को सपोर्ट करना शुरू कर दिया. इस वजह से दक्षिणी पश्चिमी और पूरा दक्षिणी हिस्सा सर यूक्रेन का टकरावित रहा है. विराष्ट्र मामलों के जानकारों का कहना है जिस तरीके से रूस ने आक्रामक तरीका यूक्रेन में युद्ध का अपनाया है उससे वह यूक्रेन के एक बड़े हिस्से को लैंड लॉक में परिवर्तित करने जैसा लग रहा है. क्योंकि इस हिस्से को कब्जे में कर लेने से ब्लैक सी पूरी तरीके से यूक्रेन के कब्जे से बाहर हो जाएगा.
उत्तर में बेलारूस रूस को सपोर्ट कर रहा रूस
विराष्ट्री मामलों के जानकार एस रामनाथन कहते हैं कि रूस ने यूक्रेन को ना केवल अंरेट से बल्कि यूक्रेन के भौगोलिक क्षेत्र के बाहरी हिस्सों से भी खेलना शुरू कर दिया है. वह बताते हैं कि उत्तर में बेलारूस रूस को सपोर्ट कर रहा है. इससे यूक्रेन की न केवल ताकत घट रही है बल्कि उस इलाके से भी हमने का पूरा डर बना हुआ है. वह बताते हैं कि बीते 24 घंटे में जिस तरीके से रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव की ओर अपने सैनिकों की बड़ी-बड़ी टुकड़िया भेजनी शुरू की है उससे एक बात एकदम तय हो चुकी है कि यूक्रेन की राजधानी पर बहुत जल्द बहुत बड़ा हमला हो सकता हैं. इसके अलावा रूस और यूक्रेन के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही है वह भी एक बड़ा कारण अब बड़े हमले की ओर ले कर जा रहा है.
अपने ऊपर प्रतिबंध से बौखलाया रूस
विराष्ट्री मामलों के जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से यूरोपीय राष्ट्रों और अमेरिका ने रूस के ऊपर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं उससे रूस निश्चित तौर पर बौखलाया है. हालांकि वह इस बात को जाहिर नहीं होने देना चाह रहा है. यही वजह है कि उसकी आक्रामकता तो बढ़ ही है बल्कि रूस के अंरेट होने वाला विरोध भी बढ़ने लगा है. विराष्ट्री मामलों के जानकारों का कहना है कि रूस भले ही इस बात की प्रतिक्रिया ना दें लेकिन पाबंदियों के बाद से रूस राष्ट्रपति को अपने कई अन्य विकल्पों के बारे में भी सोचने की आवश्यकता पड़ रही है. इसमें यूरोप के भीतर किए जाने वाले व्यापारिक समझौते और दुनिया के दूसरे देशों में किए जाने वाले बड़े व्यापारिक समझौते भी शामिल है.