- भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट
- गिरावट का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा एसेट्स (FCA) और स्वर्ण भंडार का कम होना है
- यूक्रेन-रूस युद्ध भी है इसका कारण
देश का विदेशी मुद्रा भंडार 19 अगस्त को खत्म हफ्ते में 6.687 अरब $ घटकर 564.053 अरब $ रह गया. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने यह जानकारी दी है. इससे पहले 12 अगस्त को खत्म हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 2.238 करोड़ $ घटकर 570.74 अरब $ रहा था.
इसे पीछे का वास्तविक कारण स्वर्ण भंडार का कम होना है
रिजर्व बैंक के शुक्रवार को जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 19 अगस्त को खत्म हफ्ते के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा एसेट्स (FCA) और स्वर्ण भंडार का कम होना है. साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, एफसीए 5.77 अरब $ घटकर 501.216 अरब $ रह गयी. आंकड़ों के अनुसार, स्वर्ण भंडार का मूल्य 70.4 करोड़ $ घटकर 39.914 अरब $ रह गया. उस दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के पास जमा विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 14.6 करोड़ $ घटकर 17.987 अरब $ पर आ गया. जबकि आईएमएफ में रखे राष्ट्र का मुद्रा भंडार भी 5.8 करोड़ $ गिरकर 4.936 अरब $ रह गया.
क्या कहता है आरबीआई?
विदेशी मुद्रा भंडार घटने के पीछे विश्व में आर्थिक मंदी आने के संकेत भी है. आरबीआई इसे कंट्रोल करने की लगातार कोशिशें कर रहा है. उसके हस्तक्षेप से मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार घटने की रेट में कमी आई है. भारतीय रिजर्व बैंक ऑफिसरों के शोध में यह बोला गया है. शोध में 2007 से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण मौजूदा समय में उत्पन्न उतार-चढ़ाव को शामिल किया गया है. केंद्रीय बैंक की विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की एक घोषित नीति है. केंद्रीय बैंक यदि बाजार में अस्थिरता देखता है, तो हस्तक्षेप करता है. हालांकि, रिजर्व बैंक मुद्रा को लेकर कभी भी लक्षित स्तर नहीं देता है.
यूक्रेन-रूस युद्ध है इसका कारण
आरबीआई के वित्तीय बाजार संचालन विभाग के सौरभ नाथ, विक्रम राजपूत और गोपालकृष्णन एस के शोध में बोला गया है कि 2008-09 के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के दौरान भंडार 22 फीसदी कम हुआ था. यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद उत्पन्न उतार-चढ़ाव के दौरान इसमें सिर्फ छह फीसदी की कमी आई है. शोध में बोला गया है कि इसमें व्यक्त विचार लेखकों के हैं और यह कोई महत्वपूर्ण नहीं है कि यह केंद्रीय बैंक की सोच से मेल खाए.
रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर अपने हस्तक्षेप उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल रहा है. यह विदेशी मुद्रा भंडार में घटने की कम रेट से पता चलता है. शोध के अनुसार, निरपेक्ष रूप से 2008-09 के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के कारण मुद्रा भंडार में 70 अरब अमेरिकी $ की गिरावट आई. जबकि Covid-19 अवधि के दौरान इसमें 17 अरब $ की ही कमी हुई. वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस साल 29 जुलाई तक 56 अरब $ की कमी आई है.