नई दिल्ली, 27 जून। भगवान जगन्नाथ की पवित्र रथ यात्रा का प्रारंभ 01 जुलाई से होने जा रहा है। विश्वप्रसिद्ध इस यात्रा में शामिल होने के लिए दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। आपको पता है कि ये यात्रा अपने आप में काफी अलग है क्योंकि ये भारत की पहली पूजा है कि जिसमें श्रीकृष्ण के साथ उनकी प्रेमिका राधा या पत्नी रुक्मिणी की पूजा नहीं होती है, बल्कि उनके साथ उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलदाऊ की पूजा होती है, जबकि भाई-बहनों की पूजा साथ में और कहीं नहीं होती है।
अधूरी मूर्ति की पूजा
इसके अलावा एक और खास बात इस यात्रा से जुड़ी है और वो ये कि इस यात्रा में अधूरी मूर्ति की पूजा होती है, जबकि आम तौर पर अधूरी मूर्ति की पूजा नहीं की जाती है। लेकिन यहां पर सदियों से अधूरी मूर्ति की पूजा होती आ रही है जिसके पीछे एक खास कारण है। दरअसल पुरी के मंदिर में प्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और दाऊ बलराम की जो मूर्ति रखी गई है वो पूरी बनी ही नहीं है, उनका सिर्फ मुंह ही बना है और ना कि हाथ-पांव। जिसके पीछे एक कथा प्रचलित है।