फाल्गुन मास की पूर्णिमा यानी 17 मार्च को होलिका दहन होगा और उसके अगले दिन रंगवाली धुलेंडी मनाई जाएगी. वहीं उसके बाद 22 मार्च को रंगपंचमी का त्योहार रहेगा. जी दरअसल ऐसी मान्यता है कि होलिका दहन के दिन होलिका की पूजा के दौरान कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए.
अब हम आपको बताते हैं कुछ नियम-
नवविवाभलाई न देखें होली : आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि नवविवाभलाई लड़कियों के लिए होलिका दहन की आग को देखना मना है क्योंकि होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक बताया जाता है. इसका मतलब है कि आप अपने पुराने वर्ष के शरीर को जला रहे हैं, इस वजह से नवविवाभलाई स्त्रीओं के लिए होलिका की अग्नि को देखना ठीक नहीं बताया जाता है. जी हाँ और यह उनके वैवाहिक जीवन के लिए ठीक नहीं होता है.
गर्भवती महिला या प्रसूता महिला न देखें होली : आप सभी को बता दें कि गर्भवती स्त्रीओं को होलिका की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए और न ही उन्हें होली की अग्नि को देखना चाहिए. जी हाँ क्योंकि ऐसा करना गर्भ में पल रहे शिशु के सेहत के लिए अच्छा नहीं बताया जाता है. यह भी कहा जाता है कि वे महिला भी इन नियमों का पालन करें जो हाल ही में मां बनी हैं.