यूक्रेन में युद्ध के दौरान (रूसी) सेना को हाल में मिले बड़े झटकों की पृष्ठभूमि में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन यूक्रेन के लोगों को जवाबी हमला करने से रोकने के लिए इस जनमत संग्रह का उपयोग कर रहे हैं. यदि ऐसा नहीं होता है तो क्रेमलिन ने चेतावनी दी है.
कीव. रूस के नियंत्रण वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में जारी जनमत संग्रह के लिए मतदान का आखिरी दिन मंगलवार है और संभावना जताई जा रही है कि रूस शीघ्र ही इन क्षेत्रों को अपनी सम्प्रभु सीमा घोषित करेगा. रूस के इस कदम से और युद्ध में परमाणु हथियार के इस्तेमाल की धमकी से उसके और पश्चिमी राष्ट्रों के बीच तनाव भी बढ़ रहा है. रूस के नियंत्रण वाले पूर्वी यूक्रेन के हिस्सों को संभवत: शुक्रवार को औपचारिक रूप से राष्ट्र में (रूस में) शामिल किए जाने की घोषणा के बाद क्षेत्र में सात महीने से जारी युद्ध एक नये घातक मोड़ पर पहुंच जाएगा. रूस ने पश्चिमी राष्ट्रों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इसके बाद वह अपनी सीमा की रक्षा कर रहा होगा और इसके लिए वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भी कर सकता है.
यूक्रेन में युद्ध के दौरान (रूसी) सेना को हाल में मिले बड़े झटकों की पृष्ठभूमि में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन यूक्रेन के लोगों को जवाबी हमला करने से रोकने के लिए इस जनमत संग्रह का उपयोग कर रहे हैं.
वहीं, कीव और पश्चिमी राष्ट्रों ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल संबंधी रूस की चेतावनी को कोरी धमकी बताया है. अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलीवान ने पुतिन द्वारा पिछले हफ्ते दी गई परमाणु हथियार के इस्तेमाल की धमकी पर उत्तर दिया. सुलीवान ने रविवार को एनबीसी से बोला कि यदि रूस ने यूक्रेन युद्ध में परमाणु हथियार के इस्तेमाल की अपनी धमकी को सच्चाई में बदल दिया तो उसे इसकी भारी मूल्य चुकानी पड़ेगी. यूक्रेन युद्ध पर अभी भी पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है क्योंकि इसके कारण बड़े पैमाने पर खाद्यान्न के अतिरिक्त ऊर्जा की कमी भी हो गयी है, हर स्थान महंगाई चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असमानता बढ़ रही है. परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात से चिंता और बढ़ी ही है. युद्ध की शुरूआत में रूस के नियंत्रण में गए और पुन: यूक्रेन के नियंत्रण में आए क्षेत्रों में मुश्किलें और कठिनाइयां आम बात हैं. कुछ लोगों के पास गैस नहीं है, बिजली, पानी नहीं है और मार्च से ही इंटरनेट सेवा भी नहीं है.
हालांकि, पिछले हफ्ते का पुतिन का यह आदेश उनके लिए मुश्किलें खड़ी करने लगा है. इसके कारण बड़ी संख्या में लोग राष्ट्र से पलायन कर रहे हैं, रूस में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन हो रहे हैं और कहीं-कहीं हिंसा भी हुई है. सोमवार को साइबेरिया के एक शहर में एक बंदूकधारी ने सेना भर्ती कार्यालय में गोलियां चलायीं जिसमें क्षेत्रीय मुख्य सेना भर्ती अधिकारी घायल हो गए. इससे पहले भर्ती कार्यालयों में कई स्थान आगजनी की घटना भी हुई थी. बड़े पैमाने पर सेना मे भर्ती से बचने के लिए राष्ट्र छोड़कर जा रहे लोगों को रोकने के ताजा प्रयासों के अनुसार रूस के ऑफिसरों ने जॉर्जिया से सटी सीमा पर सेना भर्ती कार्यालय खोलने की योजना बनायी है. राष्ट्र छोड़ने के मुख्य मार्गों में से जॉर्जिया की सीमा भी एक है. वहीं, जनता के गुस्से को शांत करने का कोशिश करते हुए रूस के कई ऑफिसरों और सांसदों ने यह माना है कि सेना में बड़े पैमाने पर भर्तियों के दौरान गलतियां हुई हैं… जब सेना कार्यालयों ने बिना किसी सेना अनुभव वाले सामान्य लोगों को भी भर्ती के लिए बुलाया था, जबकि उन्हें नहीं बुलाया जाना चाहिए था. उन्होंने इस गलती को सुधारने का वादा भी किया है.