विस्तार भारतीय बार एसोसिएशन ने बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के विरूद्ध असत्ये, निंदनीय और अवमाननापूर्ण आरोप लगाने के लिए शिवसेना सांसद संजय राउत और अन्य के विरूद्ध अवमानना याचिका-सह-जनहित याचिका (पीआईएल) पंजीकृत की है. समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका के पीछे मुख्य कारण के रूप में वकीलों के संघ ने भाजपा के किरीट सोमैया को छलधड़ी के मामले में अरैस्टी से अंतरिम संरक्षण दिए जाने के बाद हाई कोर्ट के न्यायाधीशों और पूरी न्यायपालिका के विरूद्ध राउत के आरोपों का हवाला दिया.
जानें क्या कहा था संजय राउत ने
संजय राउत ने टकरावित बयान देते हुए कहा था कि एक तरफ, न्यायालयों ने भाजपा से जुड़े लोगों को राहत दी, लेकिन शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एनसीपी के आरोपियों को राहत नहीं दी. उनका संकेत न्यायालयों द्वारा कोई राहत नहीं देने की ओर था. कारागार में बंद मंत्रियों नवाब मलिक और अनिल देशमुख को लेकर न्याययपालिका के रुख में पक्षपात का आरोप लगाया था.
राउत ने किरीट सोमैया को अरैस्टी से राहत देने पर उठाया था प्रश्न
पिछले हफ्ते, राउत ने बंबई हाई कोर्ट के आदेश पर सोमैया को अरैस्टी से अंतरिम संरक्षण देने के आदेश पर प्रश्न उठाया था, जो कि युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को समाप्त होने से बचाने के लिए एकत्र किए गए धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित था.
उद्धव ठाकरे समेत इन नेताओं को भी बनाया गया प्रतिवादी
अवमानना याचिका में महादेश के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल और सामना की संपादक रश्मि ठाकरे को भी प्रतिवादी बनाया गया है.
इससे पहले 5 अप्रैल को ईडी ने राउत के विरूद्ध की थी कार्रवाई
बता दें कि इससे पहले पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में प्रवर्तन निराष्ट्रालय (ईडी) ने 5 अप्रैल को शिवसेना सांसद संजय राउत की संपत्ति कुर्क कर ली थी. इस कार्रवाई के अनुसार जांच एजेंसी ने राउत के अलीबाग स्थित आठ प्लॉट और दारेट में एक फ्लैट को कुर्क किया.