नई दिल्ली, 21 मार्च . राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को वन नेशन, वन इलेक्शन लागू करने के समर्थन में उच्चतम न्यायालय के वकीलों, शिक्षाविदों और तमाम वालंटियर्स ने संविधान सपोर्ट ग्रुप के बैनर तले एक कार्यक्रम आयोजित किया. समूह ने कहा कि कार्यक्रम में इस विषय पर चर्चा की गई कि 1952 से 1967 तक राष्ट्र में यही प्रणाली लागू थी, तो अब यह क्यों नहीं हो सकता.
संविधान सपोर्ट ग्रुप के सदस्यों का बोलना है कि यह मुहिम का दूसरा चरण है, और इसे प्रारम्भ करने से पहले देशभर के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वे किया गया है. करीब 300 सांसदों से वार्ता की गई है, जिनमें कुछ विपक्षी सांसद भी इस पहल के पक्ष में हैं.
समूह ने घोषणा की कि 24-25 मार्च को दिल्ली के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जागरुकता कार्यक्रम होंगे, जिसमें देशभर के युवा और विद्यार्थी भाग लेंगे. इसके बाद 26 मार्च को जंतर-मंतर पर एक हजार से अधिक पुरुष अपनी आवाज उठाने के लिए अनशन पर बैठेंगे. इसके बाद 27 मार्च को अंबेडकर मूर्ति से संसद तक एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा.
सुप्रीम न्यायालय के वकील और संविधान सपोर्ट ग्रुप के वालंटियर हर्ष दाहिया ने कहा, हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वन नेशन-वन इलेक्शन की जरूरत गवर्नमेंट और विपक्ष तक पहुंचे. हम चाहते हैं कि युवा इस मामले पर आवाज़ उठाएं और यह संदेश संसद तक पहुंचे. हमारा उद्देश्य यह है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र का युवा यह साफ कर सके कि वह वन नेशन-वन इलेक्शन के पक्ष में है.
समूह के एक और वालंटियर देवेंद्र भारद्वाज ने कहा, हम जानते हैं कि राष्ट्र में बड़े बदलावों का नेतृत्व युवाओं ने किया है. इस मुहिम का उद्देश्य यह है कि वन नेशन-वन इलेक्शन के अनुसार चुनाव प्रक्रिया को सरल और कारगर बनाया जाए. हम सभी सियासी दलों से आग्रह करते हैं कि वे युवाओं की इस मांग को समझें और इसे लागू करने की प्रक्रिया पर काम करें.
एक स्त्री वालंटियर ने कहा, हम पीएम तक अपनी आवाज पहुंचाने का कोशिश करेंगे और उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे, जो हमारे राष्ट्र के युवाओं की सामूहिक ख़्वाहिश का प्रतीक होगा. हम चाहते हैं कि वे इस दिशा में कदम बढ़ाएं और वन नेशन-वन इलेक्शन को जल्द से जल्द लागू करें.