भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) का मानना है कि 2025-26 में बाहरी चुनौतियों के बावजूद गवर्नमेंट पूंजीगत व्यय और उपभोक्ता खर्च में वृद्धि से राष्ट्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी.
फिक्की ने अपनी ताजा इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में बोला कि गवर्नमेंट का फोकस पूंजीगत खर्च पर है और यह वित्त साल 2025-26 में विकास की गति को बढ़ाने में अहम भूमिक निभाएगा.
रिपोर्ट में बोला गया है कि बुनियादी ढांचे और इससे जुड़े क्षेत्रों जैसे सड़क, आवास, लॉजिस्टिक्स और रेलवे में निवेश से आर्थिक गति को और बढ़ावा मिलने की आशा है.
रिपोर्ट में आगे बोला गया कि कृषि क्षेत्र के अच्छे आउटलुक के कारण इस साल ग्रामीण खपत में सुधार देखने को मिल सकता है. इससे उपभोग में बढ़ोत्तरी होगा. महंगाई में आने वाले समय में कमी देखने को मिल सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को कम किया जा सकता है. इससे खपत को और बढ़ावा मिलेगा.
इंडस्ट्री बॉडी ने अपने आउटलुक में आगे बोला कि इन सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए वित्त साल 2025-26 में जीडीपी वृद्धि रेट 6.5 फीसदी से लेकर 6.9 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है.
रिपोर्ट में कहा गया कि आनें वाले वित्त साल में महंगाई रेट 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है, जो कि आरबीआई (आरबीआई) के अनुमान के अनुसार है.
रिपोर्ट में आगे बोला गया है कि संभावित यूएस-चीन व्यापार संघर्ष आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकते हैं और अल्पावधि में इनपुट लागत बढ़ा सकते हैं. हालांकि, अर्थशास्त्रियों को आशा है कि अमेरिका हिंदुस्तान के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगा. वहीं, चीन से बाहर जाते उद्योगों से हिंदुस्तान को फायदा होगा.
रिपोर्ट में बोला गया है, टारगेटेड औद्योगिक नीतियां और क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियां इन अवसरों को भुनाने के लिए जरूरी रहेंगी. अमेरिकी कच्चे ऑयल का उत्पादन बढ़ने से वैश्विक स्तर पर ऑयल की कीमतों कम होगी, जिसका लाभ हिंदुस्तान को मिलेगा.
जोखिमों को दूर करने और अवसरों को अनलॉक करने के लिए रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों ने सिफारिश की है कि हिंदुस्तान को राजस्व स्थिरता और न्यूनतम घरेलू असर सुनिश्चित करते हुए चुनिंदा और विशिष्ट अमेरिकी आयातों पर शुल्क कम करने का मूल्यांकन करना चाहिए.