CAA Rules: CAA यानी नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद अब नियमों को लेकर चर्चाएं हैं। इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दस्तावेजों से जुड़े नियम पर स्थिति साफ की है। उनका बोलना है कि गवर्नमेंट ऐसे प्रवासियों के लिए नियम बनाने का काम कर रही है, जिनके पास कागज नहीं हैं। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने साफ किया है कि CAA के अनुसार किसी की नागरिकता छीनी नहीं जा सकती।
शाह ने गुरुवार को बोला कि CAA में ऐसे गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए कोई प्रावधान नहीं है, जिनके पास महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं। फिलहाल, सीएए के अनुसार हिंदुस्तान की नागरिकता पाने के लिए दो डॉक्यूमेंट्स बहुत महत्वपूर्ण है। इनमें एक डॉक्यूमेंट्स यह साबित करता हो कि नागरिकता हासिल करने की प्रयास कर रहा आदमी पात्र राष्ट्रों से ही आया हो।
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वहीं, दूसरे महत्वपूर्ण डॉक्युमेंट के जरिए यह दिखाना होगा कि वे 31 दिसंबर 214 के पहले हिंदुस्तान आए थे। खास बात है कि सोमवार को ही गवर्नमेंट ने नागरिकता के लिए अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया है।
एएनआई को दिए साक्षात्कार में शाह ने कहा कि गवर्नमेंट का अनुमान है कि नागरिकता के लिए कोशिश कर रहे 85 प्रतिशत लोगों के पास महत्वपूर्ण कागज हैं। साथ ही उन्होंने जानकारी दी है कि गवर्नमेंट जल्द ही उन लोगों के लिए भी विकल्प की तलाश करेगी, जिनके पास डॉक्यूमेंट्स उपस्थित नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘जिनके पास डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं, उनके लिए हम रास्ता खोजेंगे, लेकिन जिनके पास डॉक्यूमेंट्स हैं, ऐसे लोगों की संख्या 85 फीसदी है।‘
क्या होगी प्रक्रिया
समाचार एजेंसी से वार्ता के दौरान शाह ने पूरी प्रक्रिया को भी समझाया। उन्होंने कहा, ‘समय निकालकर आवेदन करें। हिंदुस्तान गवर्नमेंट आपको आपकी समय की सुविधा के हिसाब से साक्षात्कार के लिए बुलाएगी। गवर्नमेंट आपको डॉक्युमेंट के ऑडिट के लिए बुलाएगी और फेस-टू-फेस साक्षात्कार होगा।‘
मुस्लिम भी कर सकते हैं आवेदन
शाह ने कानून के जरिए किसी की नागरिकता छिनने की बात से भी इनकार किया है। उन्होंने बोला कि कानून का मकसद मुसलमान बहुल राष्ट्रों में सताए जा रहे अल्पसंख्यकों की सहायता करना है। बीजेपी नेता ने यह भी बोला कि संविधान सभी धर्मों और समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता लेने की अनुमति देता है।
उन्होंने कहा, ‘मुसलमानों को भी नागरिकता के लिए आवेदन करने का अधिकार है। दरवाजे किसी के लिए भी बंद नहीं हैं।‘