कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे छत्तीसगढ़ जिले के जांजगीर-चापा पहुंचे हुए हैं। यहां कांग्रेस पार्टी पार्टी के कार्यक्रम ‘भरोसे का सम्मेलन’ में शामिल होने के लिए वे पहुंचे हुए हैं। यहां उन्होंने मणिपुर मुद्दे पर पीएम मोदी का घेराव किया। उन्होंने कहा, ‘मोदी जी ने (मणिपुर पर) उत्तर नहीं दिया कि राहुल गांधी या I.N.D.I.A गठबंधन के नेताओं ने उनसे क्या पूछा। इसके बजाय, उन्होंने नेहरू जी और कांग्रेस पार्टी नेताओं का मजाक उड़ाया। मोदी जी कहते रहते हैं कि उन्होंने सब कुछ किया है। क्या मोदी के सत्ता में आने के बाद छत्तीसगढ़ में बिजली, विद्यालय आदि आए? मोदी और शाह हमारे द्वारा स्थापित सरकारी विद्यालयों में पढ़े हैं, या क्या उन्होंने लंदन या ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई की? वे हमसे पूछते हैं कि कांग्रेस पार्टी पार्टी ने पिछले 70 सालों में क्या किया? हमने सिर्फ़ सब कुछ यथास्थान पर रखा था।
प्रधानमंत्री पर बरसे कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष
इससे पहले खरगे ने ट्वीट कर बोला कि “लूट और जुमलों ने राष्ट्र को अस्वस्थ बना दिया। पीएम के हर शब्द में सिर्फ़ असत्य है। उन्होंने कई एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) बनाने का दावा किया, लेकिन सच्चाई यह है कि एम्स को डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।” कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष ने कहा, “मोदी जी, कोविड-19 महामारी में उदासीनता से लेकर आयुष्मान हिंदुस्तान में घोटाले तक, आपकी गवर्नमेंट ने राष्ट्र की स्वास्थ्य प्रबंध को बीमार बना दिया है।” उन्होंने बोला कि अब लोग जाग गए हैं। आपके धोखे को पहचान लिया गया है। आपकी गवर्नमेंट की विदाई का समय आ गया है।
अविश्वास प्रस्ताव के बाद कही थी ये बात
बता दें कि कांग्रेस पार्टी द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर पीएम मोदी ने जब सदन में उत्तर दिया। इसके बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्वीट कर बोला था कि धन्यवाद पीएम जी, आखिरकार आपने मणिपुर अत्याचार पर सदन में अपनी बात रखी। हमें भरोसा है कि मणिपुर में शांति बहाली की गति तेज होगी। राहत शिविरों से लोग अपने घरों को लौटेंगे। उनका पुनर्वास होगा, उनके साथ न्याय होगा।’ खरगे ने आगे बोला कि आपने यदि अपना राजहठ और अहंकार पहले त्याग दिया होता तो संसद का कीमती समय बचता। अहम विधेयक अच्छी चर्चा के साथ पास होते। उन्होंने कहा, ‘हमें तकलीफ है कि मणिपुर अत्याचार जैसे अभूतपूर्व मामले पर विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव जैसे संसदीय हथियार का इस्तेमाल करना पड़ा।