जहां तक मोदी की अमेरिका यात्रा का वहां की राजनीति के हिसाब से महत्व है तो आपको बता दें कि अमेरिका इस समय महंगाई और मंदी के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में उसे हिंदुस्तान की सहायता की आवश्यकता है ताकि बाडइन अगले वर्ष होने वाले चुनावों के दौरान मतदाताओं के कोप से बच सकें.
इसमें कोई दो राय नहीं कि पीएम मोदी के कार्यकाल में हिंदुस्तान के संबंध अमेरिका के साथ नयी ऊँचाइयों पर पहुँचे हैं. अब तक अमेरिका के तीन राष्ट्रपतियों- बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन के साथ काम कर चुके पीएम मोदी के संबंध सभी के साथ प्रगाढ़ रहे और इसके चलते उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को नयी दिशा तो दी ही साथ ही भारतीय हितों को भी हमेशा अहमियत दी. मोदी और बाइडन के रिश्तों का जिक्र करें तो यह बहुत बहुत बढ़िया हैं. विभिन्न मंचों पर मोदी और बाइडन जब मिलते हैं तो उनकी मित्रता देखते ही बनती है. अब बाइडन के निमंत्रण पर पीएम अगले महीने अमेरिका की पहली आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं, इसलिए इस यात्रा को काफी जरूरी बताया जा रहा है. दरअसल अमेरिका और भारत, दोनों के ही चीन के साथ संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं, इसके अतिरिक्त रूस-यूक्रेन युद्ध आगे बढ़ता जा रहा है और हिंदुस्तान की किरदार तटस्थ राष्ट्र की बनी हुई है, साथ ही हिंदुस्तान इस वर्ष जी-20 का अध्यक्ष है और अमेरिका हिंदुस्तान की अध्यक्षता में हो रही बैठकों को पूर्ण समर्थन दे रहा है. इसके अलावा, सबसे खास बात यह कि अगले वर्ष मोदी और बाइडन, दोनों को ही चुनावों का सामना करना है, इसलिए मोदी की इस यात्रा का रणनीतिक के साथ ही सियासी महत्व भी है. मोदी अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर तो जा ही रहे हैं साथ ही इसी वर्ष सितंबर में जब जी-20 राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक नयी दिल्ली में होगी तब अमेरिकी राष्ट्रपति भी उसमें शामिल होंगे.
मोदी की अमेरिका यात्रा का सियासी महत्व
जहां तक मोदी की अमेरिका यात्रा का वहां की राजनीति के हिसाब से महत्व है तो आपको बता दें कि अमेरिका इस समय महंगाई और मंदी के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में उसे हिंदुस्तान की सहायता की आवश्यकता है ताकि बाडइन अगले वर्ष होने वाले चुनावों के दौरान मतदाताओं के कोप से बच सकें. इसी प्रकार मोदी भी हिंदुस्तान को तकनीक और निवेश दिलाने, हिंदुस्तान के सेमीकंडक्टर अभियान के लिए दोनों राष्ट्रों के कार्यबल के लिए योगदान बढ़ाने तथा अनिवासी हिंदुस्तानियों के अनेक मुद्दों को सुलझाने के लिए बाइडन का योगदान ले सकते हैं. वैसे भी, अमेरिका में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए हिंदुस्तान कोशिश प्रारम्भ कर भी चुका है. हम आपको याद दिला दें कि दुनिया में मंदी के बीच भारतीय विमानन कंपनी एअर इण्डिया ने हाल ही में अमेरिका और फ्रांस से बड़े विमान सौदे करने की घोषणा की थी. एअर इण्डिया ने अमेरिका की बोइंग से 34 अरब $ में 220 विमान खरीदने का निर्णय किया है जिससे कई अमेरिकी राज्यों में रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ है. स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने बोला था कि यह बिक्री 44 राज्यों में 10 लाख से अधिक अमेरिकी नौकरियों में मददगार होगी. इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान और अमेरिका ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (आईसीईटी) पहल के अनुसार अंतरिक्ष, सेमी-कंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला, रक्षा सह-उत्पादन और सह-विकास तथा ज्ञान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में द्विपक्षीय योगदान को लगातार बढ़ा रहे हैं जिसे मोदी की यात्रा से और मजबूती मिलेगी.
मोदी की यात्रा से पहले डोभाल करके आ गये थे तैयारी
इसके अलावा, हम आपको यह भी बता दें कि इस वर्ष की आरंभ में हिंदुस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने अपने अमेरिकी दौरे के दौरान कई जरूरी तकनीकी समझौते भी किये थे जिससे हिंदुस्तान को सेना रणनीतिक रूप से भी कई फायदा होंगे. उसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पीएम मोदी को अमेरिका की राजकीय यात्रा का निमंत्रण दिया था. डोभाल की यात्रा के दौरान हिंदुस्तान और अमेरिका तीन अरब $ से अधिक की लागत वाले 30 ‘एमक्यू 9बी प्रीडेटर आर्म्ड ड्रोन’ के सौदे को आखिरी रूप देने के बिल्कुल करीब पहुँच गये थे. बताया जा रहा है कि मोदी की यात्रा के दौरान इस सौदे पर हस्ताक्षर किये जा सकते हैं. हम आपको बता दें कि इन ड्रोन्स की सहायता से हिंदुस्तान को असली नियंत्रण रेखा (एलएसी) और हिंद महासागर के आसपास अपने समग्र नज़र तंत्र को मजबूत करने में सहायता मिलेगी. एमक्यू 9बी प्रीडेटर आर्म्ड ड्रोन को हिंदुस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रक्षा जरूरतों के लिए एक जरूरी हिस्सा बताया जा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन जल्द से जल्द इस सौदे को अमली जामा पहनाना चाहता है, क्योंकि इससे अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सियासी रूप से भी यह सौदा लाभकारी होगा.
मोदी की अमेरिका यात्रा का रणनीतिक महत्व
मोदी की अमेरिका यात्रा के रणनीतिक महत्व पर गौर करें तो आपको बता दें कि इस दौरान इस बात पर जोर रहेगा कि ‘क्वाड’ जैसे समूहों को कैसे मजबूत किया जाये. इसके अलावा, पीएम मोदी अमेरिकी दौरे के दौरान अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित कर सकते हैं और इस दौरान हिंदुस्तान के बारे में विपक्षी नेताओं द्वारा विश्व स्तर पर फैलाये गये अनेक भ्रमों और अफवाहों को दूर कर सकते हैं. इसके अलावा, मोदी की अमेरिका यात्रा द्विपक्षीय सामरिक संबंधों के बढ़ते महत्व और दोनों पक्षों के एक खुले एवं स्वतंत्र हिन्द प्रशांत के विचारों को रेखांकित करती है. पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों राष्ट्रों के समग्र और अग्रसर अंतरराष्ट्रीय सामरिक गठजोड़ को और प्रगाढ़ बनाने का बहुमूल्य अवसर भी प्रदान करेगी. बताया जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं को कारोबार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, उद्योग, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, लोगों के बीच सम्पर्क सहित साझा हितों से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों की समीक्षा करने का अवसर प्राप्त होगा. यह भी बताया जा रहा है कि मोदी और बाइडन भारत-अमेरिका गठजोड़ को मजबूत बनाने और जी-20 सहित बहुपक्षीय मंचों पर योगदान बढ़ाने के रास्ते तलाशेंगे. बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से पीएम मोदी के लिए 22 जून को राजकीय भोज का आयोजन भी किया जायेगा.
बहरहाल, यात्रा की तैयारियों से जुड़े जानकार ऑफिसरों ने बताया है कि पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के कार्यक्रम पर अभी काम किया जा रहा है और आसार है कि उनकी यात्रा चार दिनों की अवधि की हो सकती है. पीएम मोदी की पिछली अमेरिका यात्रा की बात करें तो आपको बता दें कि वह सितंबर 2021 में क्वाड समूह के नेताओं की बैठक में हिस्सा लेने वाशिंगटन गए थे. उस यात्रा के दौरान पीएम मोदी की बाइडन के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई थी. इसके अतिरिक्त भी दोनों नेता समय-समय पर टेलीफोन पर वार्ता करते रहते हैं और बहुपक्षीय मंचों पर मुलाकातें करते रहते हैं.