संयुक्त देश । संयुक्त राष्ट्र
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मंगलवार को बोला कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय
अफगानिस्तान में आतंकियों की मौजूदगी को लेकर चिंतित है, जिसका प्रभाव
क्षेत्र और उससे आगे भी है.
दोहा में बुलाई गई अफगानिस्तान पर विशेष दूतों की एक बैठक के बाद
गुटेरेस ने बोला कि प्रतिभागी उस राष्ट्र की स्थिरता के बारे में चिंतित थे और
आतंकवादी संगठनों की लगातार मौजूदगी देश, क्षेत्र के लिए जोखिम के बारे में
गंभीर चिंता जताई.
उन्होंने बोला कि नशीले पदार्थो की स्मग्लिंग अफगानिस्तान के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
बैठक में भाग लेने वाले 21 राष्ट्रों के साथ-साथ यूरोपीय संघ और इस्लामिक योगदान संगठन में हिंदुस्तान भी शामिल था.
गुटेरेस
ने बोला कि बैठक तालिबान शासन को मान्यता देने के बारे में नहीं थी और जहां
तक उनके साथ बैठक की बात है, उन्होंने बोला कि यह ऐसा करने का ठीक समय नहीं
है.
उन्होंने कहा, बैठक अफगानिस्तान के लिए एक सामान्य
अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करने के बारे में थी और प्रतिभागियों ने न
सिर्फ सगाई की रणनीति की जरूरत पर सहमति व्यक्त की, जो अफगानिस्तान के
स्थिरीकरण की अनुमति देता है, बल्कि जरूरी चिंताओं को दूर करने की भी
अनुमति देता है.
उन्होंने कहा, हालांकि भिन्न-भिन्न राष्ट्रों ने इन
चिंताओं पर भिन्न-भिन्न प्राथमिकताएं रखीं, लेकिन उनकी अपनी स्थिति के अनुसार,
एक सामान्य मान्यता है कि वे आपस में जुड़े हुए हैं.
गुटेरेस ने तालिबान के अनुसार मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन, विशेष रूप से स्त्रियों पर प्रतिबंध की भी निंदा की.
उन्होंने
कहा, मैं पूरी तरह से साफ हूं : हम स्त्रियों और लड़कियों के अधिकारों पर
अभूतपूर्व, प्रणालीगत हमलों के सामने कभी भी चुप नहीं रहेंगे.
गुटेरेस
ने तालिबान शासित अफगानिस्तान में स्थिति को आज दुनिया में सबसे बड़ा
मानवीय संकट के रूप में वर्णित किया, जिसमें 60 लाख अफगान अकाल जैसी
स्थितियों का सामना कर रहे हैं, जबकि 28 लाख लोगों के जीवित रहने के लिए इस
साल मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी.
उन्होंने बोला कि मानवतावादी प्रतिक्रिया योजना के लिए 4.6 अरब $ की अपील में गंभीर कमी थी, सिर्फ 294 मिलियन अरब $ प्राप्त हुए.